स्वर के कितने भेद होते हैं|Swar ke kitne bhed hote hain

sangya ke kitne prakar hoti hain

हिंदी व्याकरण में स्वर कितने प्रकार के होते हैं(Swar ke kitne bhed hote hain) , क्या आप इस प्रश्न का उत्तर जानना चाहते हैं, यदि हाँ, तो आप सही जगह पर आए हैं, और आपको स्वर के बारे में खोज करने के लिए  और कहीं जाने की जरुरत नहीं है।

यहां हम  स्वर के सभी भेदों के वारे में चर्चा करने वाले हैं , इसलिए यदि आप स्वर के सभी प्रकारों के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए एकदम सही है।

इस लेख में हम स्वर के  सभी भेदों को विस्तार से चर्चा की है ,ताकि आपको स्वर के सभी भेदों को बेहतर से समझने में आसान हो सके ,इसलिए हमे यकीन है यह लेख आपकेलिए बेस्ट सावित रहेगा।

यकीन मानिए, इस लेख को पढ़कर आप स्वर के सभी प्रकारों के बारे में बेहतर से जान पाएंगे और इससे जुड़े किसी भी सवाल को आसानी से हल कर पाएंगे।स्वर के कितने भेद होते हैं .

स्वर कितने प्रकार के होते हैं(Swar ke kitne bhed hote hain)

स्वर के प्रकारों पर चर्चा करने से पहले, हम पहले स्वर के बारे में थोड़ी चर्चा करते हैं। वैसे आपको बता दें ,हिंदी व्याकरण में कुल तो प्रकार के वर्ण होते है जिसमे से एक है व्यंजन और दूसरा है स्वर जिसे अंग्रेजी में “vowel” के नाम से जाना जाता हैं।

स्वर के परिभाषा की बात करें तो,  जिन वर्ण का उच्चारण दूसरे वर्ण की सहायता के बिना उच्चारण किया जाता है  ,उन वर्णों को स्वर वर्ण कहा जाता हैं। 

स्वर के  कितने भेद होते हैं:

आपको बता दें की हिंदी व्याकरण के कुल स्वर की संख्या  11 होती  हैं।

जैसे – अ,आ, इ ,ई ,उ,ऊ ,ऋ ,ए ,ऐ ,ओ  और औ।

 स्वर के प्रकार-

मात्रा के आधार पर स्वर कितने होते हैं:

मात्रा तथा उच्चारण में लगने वाले समय के अनुसार मात्रा कुल 3 परकार के होते हैं,जिसमे से एक है  हस्व स्वर ,दूसरा है दीर्घ स्वर और  तीसरा है  प्लुत स्वर । 

1-हस्व स्वर2-दीर्घ स्वर 3-प्लुत स्वर

1# हस्व स्वर

  • हस्व स्वर को लघु स्वर ,छोटा स्वर और मूल स्वर के रूप में भी जान जाता हैं।
  • हस्व स्वर को एकमात्रिक स्वर भी कहा जाता हैं ,किउंकि हस्व स्वरों में कोई मात्रा नहीं होती हैं .

हस्व स्वर के  परिभाषा – ऐसे स्वर जिन्हे उच्चारण करने में या बोलने में वहुत ही कम समय लगता है,उन स्वरों को हस्व स्वर कहा जाता हैं ।हस्व स्वर की कुल संख्या 4 होती हैं ,जैसे अ ,इ ,उ ,ऋ

2# दीर्घ स्वर

  • गुरु/बड़ा/द्विमात्रिक होते हैं।
  • दीर्घ स्वर को संधि स्वर के नाम से भी जाना जाता हैं।
  • दीर्घ स्वरों की दो मात्राएँ होती हैं। 

दीर्घ स्वर के परिभाषा – ऐसे स्वर जिन्हे उच्चारण करने में या वोलने में हस्व स्वर का दो गुनी समय लगता हैं,उन स्वरों को बिसेष रूप से दीर्घ स्वर कहा जाता हैं।

दीर्घ स्वर की संख्या 7 होती हैं 

जैसे आ ,ई ,ऊ ए ,ऐ,ओ औ

ए ,ऐ ,ओ औ इन चरों स्वरों को संजुक्त स्वर भी कहा जाता हैं।

3# प्लुत स्वर

प्लुत स्वर के परिभाषा – इन स्वरों को लगातार बिना रुके उच्चारण किया जा सकता है,यानी ऐसे स्वर जिन्हे लम्बे समय तक बिना रुके लगातार उच्चारण किया जा सकता है ,उन्हें प्लुत स्वर कहा जाता हैं। प्लुत स्वर की कुल संख्या आठ होती हैं। जैसे : अ और 7 दीर्घ स्वर आ ,ई ,ऊ ए ,ऐ,ओ औ को प्लुत स्वरों के रूप में गिने जाते हैं।

ओष्ठ आकृति के आधार स्वर कितने होते हैं :

1 – वृत्ताकार 2 – अवृत्ताकार

1# वृत्ताकार स्वर

वृत्ताकार स्वर स्वर को वृत्तमुखीं भी कहते हैं। इसे संधिविच्छेत करे तो ब्रुत +आकर होता हैं। इसकी कुल संख्या 4 होती हैं। जैसे : उ ,ऊ ,ओ और औ

ऐसे स्वर जिन्हे उच्चारण करते समय होंठ बृत्त के आकर में खुलते हैं ,उन स्वरों को वृत्ताकार स्वर कहा जाता हैं ।

2 # अवृत्ताकार स्वर 

इसे आबृत्तमुखी भी कहा जाता हैं।

जिन स्वरों को उच्चारण करते समय होंठ बृत्त के आकर में नहीं खुलते उन्हें अवृत्ताकार स्वर कहा जाता हैं।

अवृत्ताकार स्वर के कुल संख्या 7 होते हैं जैसे अ ,आ ,इ ,ई ऋ ए और ऐ

जीव के क्रियाशीलता के आधार पर स्वर कितने होते हैं:

जिव के क्रियाशीलता के दृष्टी से स्वर कुल तीन प्रकार के होते हैं। 1 – अग्र स्वर -इ /ई /ए /ऐ /ॠ 2 -मध्य स्वर – अ 3 – पश्च स्वर – आ /उ /ऊ /ओ /औ

तालु की स्थिति के आधार पर स्वर कितने  प्रकार हैं :

तालु के आधार पर स्वर चार प्रकार होते हैं 1 – संवृत स्वर (वंद स्वर )-इ /ई /उ /ऊ /ऋ 2 -अर्धसंवृत – ए /ओ / 3-विवृत स्वर (खुला स्वर ) – आ 4 -अर्धबिवृत -अ /ऐ /औ

फाइनल वर्ड :

हम मानते हैं कि आपने स्वर और उसके सभी प्रकारों के बारे में अच्छी तरह से जान लिया होगा,लेकिन फिर स्वर के भेद को लेकर आपके मन में किसी भी तरह का सवाल है, तो हमे कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं ,और हम आपके सवाल को हल करने में आपकी मदत करेंगे।,वैसे स्वर व्याकरण का एक ही वहुत ही महत्वपूर्ण विषय है ,इसलिए ,इस लेख को अच्छे से पढ़ें।

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