संज्ञा के कितने भेद होते हैं |Sangya ke kitne bhed hote hain

sangya ke kitne bhed hote hain

यह लेख आपके लिए सबसे अच्छा सावित होने वाला है यदि आप जानना चाहते हैं कि संज्ञा के कितने भेद होते हैं (Sangya ke kitne bhed hote hain),किउंकि यहाँ हम संज्ञा के सभी भेदों के ऊपर विस्तार से चर्चा की हैं।

संज्ञा के कितने भेद या प्रकार हैं, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है, यह कई प्रश्न पत्रों में पूछा जाता है, इसलिए इस प्रश्न का उत्तर जानना बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर यदि आप किसी प्रकार के परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

वैसे, आप सही जगह पर आए हैं, इसलिए आपको संज्ञा के सभी अंतरों का पता चल जाएगा, जिससे आप अपनी आगामी परीक्षाओं में इससे संबंधित किसी भी प्रश्न को आसानी से हल कर पाएंगे।

तो चलिए बिना कुछ समय गवाए संज्ञा के सभी भेदों पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

संज्ञा के कितने भेद होते हैं (Sangya ke kitne bhed hote hain)

वैसे, आपने स्कूल में या किसी से  जरूर सुना होगा कि संज्ञा  के प्रकार मूल रूप से पाँच या तीन है, लेकिन वास्तव में संज्ञा मूल रूप से 2 प्रकार की होती है। हम जानते हैं कि आप यह सुनकर आश्चर्यचकित रह गए होंगे, लेकिन वास्तव में यह सच है कि मूल रूप से दो प्रकार की संज्ञाएं होती हैं, जिनमें से एक यथार्थ संज्ञा है और दूसरी एक है भाववाचक संज्ञा ।

संज्ञा के मूल रूप से 2 भेद होते  हैं:

1) यथार्तवाचक संज्ञा
2) भाववाचक संज्ञा

1) यथार्तवाचक संज्ञा :

वास्तविक नाम, दृश्य और मृतक के नामों को   विशेष रूप से यथार्थवाचक संज्ञा के रूप में गिना जाता है।
यथार्थवाचक संज्ञा  का अर्थ है किसी निर्दिष्ट व्यक्ति के नाम, वस्तुओं के नाम और स्थानों के नाम।
ये दृश्य  होते हैं - इन्हे  हम अपनी आँखों से देख सकते हैं।

यथार्थवाचक संज्ञा के परिभाषा - ऐसे शब्द(नाम ) जिसका उच्चारण करते समय या सुनते समय हमारे माइंड में किसी भी तरह के चित्र प्रकट होता हैं, उन शब्दों को यथार्थवाचक संज्ञा कहा जाता हैं। हमे इन्हे छु सकते हैं और देख भी सकते हैं।

जैसे - टेबल,मनुष्य ,पानी,पाहड ,राधिका ,श्याम आदि।

राधिका  - यह "राधिका " शब्द को उच्चारण करते समय हमारे मन में एक लड़की के दृश्य प्रकट होता हैं,इसलिए आइल यह एक यथार्थवाचक संज्ञा हैं। 

पानी - इसे चरण करते समय या सुनते समय हमारे जेहन में पानी के दृश्य प्रकट हो जाता हैं।

पहाड़ -इस  "पहाड़ "  शब्द या नाम का उच्चारण करते या सुनते समय हमारे दिमाग में एक पहाड़ की छवि दिखाई देती है।

यथार्थ वाचक संज्ञा के प्रकार:

आपको बता दें की यथार्थवाचक संज्ञा के दो भेद होते हैं ,लेकिन आपको बता दें की पाहिले यथार्थ वाचक संज्ञा को चार प्रकार में बाटा गया था जैसे की ,व्यक्तिवाचक संज्ञा,जातिवाचक संज्ञा ,द्रव्यवाचक संज्ञा और समूह वाचक संज्ञा।

लेकिन बात में द्रव्यवाचक संज्ञा और समहुवाचक संज्ञा को जातिवाचक संज्ञा में शामिल कर दिया गया ,यानी अब उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा के भेदों के रूप से गिना जाता हैं। ,इसलिए अब यथार्थ वाचक संज्ञा के प्रकार मूल रूप से 2 होते हैं।

a) व्यक्तिवाचक संज्ञा (vyakti vachak sangya)

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा दृश्य होते हैं ,अर्थात हम उन्हें देख सकते हैं।
  • इस प्रकार की संज्ञाएं हमेशा एकवचन होती हैं, हम चाहकर भी उन्हें बहुवचन नहीं बना सकते हैं।
  • हम द्रव्यवाचक संज्ञाएँ को स्पर्श और उपयोग भी कर सकते हैं।
  • द्रव्यवाचक संज्ञा को वस्तु वाचक संज्ञा भी कहा जाता है।
  • वे किसी भी अवस्था में हो सकते हैं, जैसे कि तरल, गैसीय और कठोर अवस्था।

व्यक्तिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं - किसी वस्तु, स्थान और व्यक्ति के निश्चित नामों को व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में गिना जाता है, अर्थात वह शब्द या नाम जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम को समझा जाता है, विशेषकर उन शब्दों को व्यक्तिवाचक संज्ञा कहा जाता है। ।

व्यक्तिवाचक संज्ञा के उदाहरण :

 राम ,श्याम,दशहरा ,होली,भारत,ओडिशा,महानदी,हिमालय ,गंगा ,आदि।

जैसे :

राहुल हर वक्त अपने दोस्त राकेश के साथ घूमता रहता है।

यहाँ राहुल और राकेश व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं।

b) जातिवाचक संज्ञा (Jativachak Sangya)

  • जातिवाचक संज्ञाएं भी दृश्य होते हैं।
  • इस प्रकार के संज्ञा बहुवचन होते हैं और यदि एकवचन हैं, तो उन्हें बहुवचन भी बनाया जा सकता है।

जातिवाचक संज्ञा  किसे कहते हैं - किसी बस्तु ,व्यक्ति स्थान के जाती ,समहू और वर्ग के नाम को जातिवाचक संज्ञा के रूप में गिनजाता हैं,यानी ऐसे शब्द या नाम जो किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के समूह या जाती के नाम को प्रकट करते हैं, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहा जाता है।

जातिवाचक संज्ञा के उदाहरण :

माँ, बच्चा,  दादी, छात्र, शिक्षक, पिता, मंत्री, महिला, पुरुष, भालू, कुत्ता, मगरमच्छ, क्रिकेट, पक्षी, भेड़िया,शेर, टाइगरकुट, टेबल, ट्रक, पुस्तक, पेंसिल, आईपैड, कंप्यूटर, कोट, जूते, शहर, राज्य, देश,आदि।

जैसे :

मेरे भाई ने बताया कि श्याम और जदू ने कल राहुल के गाँव से एक बकरी चुरा ली।

यहाँ भाई ,बकरी और गांव जातिवाचक संज्ञाएँ हैं।

जातिवाचक संज्ञा के भेद( jativachak sangya ke kitne bhed hain)

वैसे हम यहां पहले बात कर चुके हैं,की जातिवाचक संज्ञा कुल दो प्रकार के होते हैं ,जिसमे से एक है द्रव्यवाचक संज्ञा और दूसरा है समूहवाचक संज्ञा ।

a) द्रव्यवाचक संज्ञा( Dravya vachak sangya)

  • द्रव्यवाचक संज्ञाएँ अगणनीय होते,हम उन्हें गिन नहीं सकते है,बल्कि उन्हें मापा या तौला जा सकता है ,जैसे सोने - हमे इन्हे गिन नहीं पाएंगे लेकिन सोने को हम तौल सकते हैं।
  • द्रव्यवाचक संज्ञा को पदार्थवाचक संज्ञा भी कहा जाता हैं। 
  • हम उन्हें किसी भी अवस्था में बदल रख सकते हैं हैं, जैसे पानीइसे हम इसे गैसीय अवस्था, तरल अवस्था या कठोर अवस्था में बदल सकते हैं।

द्रव्यवाचक संज्ञा किसे कहते हैं - ऐसे संज्ञा शब्द जो किसी वस्तु या पदार्थ के निर्दिष्ट नाम को दर्शाते हैं, उन संज्ञा शब्दों को मूल रूप से द्रव्यवाचक संज्ञा कहा जाता है,जैसे सोना, चांदी, लकड़ी, आदि।

द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण :

तांबा,चांदी,लोहा, सोना, रेत, मिट्टी, चट्टान, बारिश, पृथ्वी, नमक, अंडा, मांस, शहद, दूध, रेशम, चमड़ा, ऊन, आदि।

जैसे :

लकड़ी से हम कई प्रकार के घरेलू उपकरण जैसे टेबल, कुर्सी आदि बना सकते हैं।

लकड़ी निर्धिस्ट किसी द्रव्य के नाम को बोध कर रहा हैं ,यानी ये एक द्रव्यवाचक संज्ञा हैं।

b) समूहवाचक संज्ञा(Samuh vachak Sangya)

समूहवाचक संज्ञा किसे कहते हैं - ऐसे संज्ञा शब्द जो एक निर्दिष्ट व्यक्ति या चीजों के समूह का नाम को सूचित करते हैं, उन संज्ञा शब्दों को समूहवाचक संज्ञा कहा जाता है,जैसे पुलिस,आर्मी,टीम ,आदि।

समूहवाचक संज्ञा के उदाहरण :

परिवार, भीड़, मेला, सभा, वर्ग, पुस्तकालय, झुंड, गिरोह, सेना, पार्टी, गुच्छा, पार्टी, टुकड़ी आदि।

जैसे :

आज एक दर्जन केले की कीमत 60 रुपये थी।

यहां एक दर्जन समूहवाचक संज्ञा हैं , एक दर्जन केले का मतलब 12 केले हैं, यानी वे एक समूह हैं, इसलिए इसे समूह संज्ञा के रूप में गिना जाता है।

2) भाववाचक संज्ञा (Bhav vachak sangya)

जिन शब्दों का उच्चारण करते समय हमारे दिमाग में कोई चित्र नहीं प्रकट होता है, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहा जाता है। हम भाववाचक संज्ञाओं को देख या छू नहीं सकते, हम केवल महसूस कर सकते हैं।

किसी वस्तु,व्यक्ति,स्थान के भाव के नाम को भाववाचक संज्ञा के रूप में गिना जाता हैं,जैसे मधुर,सुंदर ,दरिद्र ,आदि। 

  • भाववाचक संज्ञाएँ अदृश्य और अवास्तविक होते हैं।
  • इन्हे छुं भी नहीं सकते हैं ,जैसे दुःख ,सुख ,आदि।

भाववाचक संज्ञा उदाहरण :

सौंदर्य, बहादुरी, आत्मविश्वास, दीप्ति, डर, क्रूरता, अपवित्रता, अहंकार, अच्छाई, पुरानापन ईर्ष्या, बुराई, जिज्ञासा, ईमानदारी

जैसे :

पूजा देखने में बहुत ही खूबसूरत दिखता है ,इसलिए हर कई इसे पसंद करता हैं।

यहाँ पर खूबसूरत और पसंद भाववाचक संज्ञाएँ हैं।

फाइनल वर्ड :

हम जानते हैं कि आप जरूर जा गए होंगे कि संज्ञा के कितने भेद होते हैं, लेकिन फिर भी अगर आपके मन में संज्ञा के प्रकार को लेकर किसी तरह का सवाल है, तो हम बेझिझक पूछ सकते हैं।

पोस्ट को शेयर करे :

संबंधित पोस्ट :

Dravya vachak-sangya

द्रव्यवाचक संज्ञा- किसे कहते हैं,भेद और उदाहरण(Dravya vachak sangya)

sangya kise kahate hain

संज्ञा किसे कहते है और इसके कितने भेद होते हैं|Sangya kise kahate hain and sangya ke kitne bhed hote hai

Leave a Comment