संज्ञा(Sangya) -किसे कहते हैं ,भेद और उदाहरण (Sangya in Hindi)

Sangya

अरे, क्या आप संज्ञा (Sangya in Hindi) के बारे में अच्छे से  जानते हैं, यदि आप नहीं जानते हैं, तो इस लेख की मदद से आप संज्ञा के बारे में सब कुछ जान पाएंगे और यदि इससे संबंधित कोई भी प्रश्न आपके परीक्षाओं में आएगा, तो आप जल्दी से जवाब देने में सक्षम हो पाएंगे ।

इस लेख के माध्यम से हमने संज्ञा के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की है ताकि आप संज्ञा को बेहतर ढंग से जानने में सहायता प्राप्त कर सकें। इससे जुड़े कोई सारे सवाल प्रतियोगी परीक्ष्याओं में बी पूछा जाता हैं,इसलिए आप संज्ञा को अच्छे से जानने की कोसिस कीजिए।

यहाँ हमने संज्ञा की परिभाषा और उसके सभी प्रकारों को विस्तार से और उदाहरणों के साथ समझने की कोशिश की है, इसलिए हम सोचते हैं कि यह लेख आपको संज्ञा के बारे में सही ढंग से जानने में उपयोगी साबित रहेगा।

 वैसे, आपको बता दें कि मूल रूप से संज्ञा के तीन प्रकार होते हैं, जैसे कि उचित संज्ञा, जातिवाचक संज्ञा और अभिव्यंजक संज्ञा, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि संज्ञा के मूल प्रकार पाँच हैं, इसलिए आपके हिसाव से संज्ञा कितने परकार के है,हमे कमेंट के माध्यम से अवश्य बताएं।

संज्ञा किसे कहते हैं | Sangya kise kahate hain

संज्ञा के परिभाषा – संसार के सभी नामों को संज्ञा के रूप में गिना जाता है, अर्थात, ऐसे शब्द जो किसी निर्दिष्ट व्यक्ति, वस्तु, भाव या स्थान के नाम को व्यक्त करते हैं, बिशेष रूप से उन्हें संज्ञा कहा जाता है,जैसे राम,हरी,पहाड़,नदी,पानी आदि।

संज्ञा के कितने प्रकार होते हैं | Sangya ke bhed

आपको बता दें कि मूल रूप से संज्ञा के तीन प्रकार होते हैं, जैसे ब्यक्तिवाचक संज्ञा , जातिवाचक संज्ञा और भाववाचक संज्ञा, लेकिन अंग्रेजी में संज्ञा को पाँच प्रकार से पढ़ा जाता है, हिंदी में भी संज्ञा के पाँच प्रकारों को पढ़े जाते हैं, लेकिन उलेकिन उन्हें अलग तरह से गिना जाता हैं।संज्ञा के भेद

संज्ञा मूल रूप से दो होते हैं

 1 ) यथार्थ वाचक संज्ञा – 2 प्रकार के होते हैंजैसे :a ) ब्यक्तिवाचक संज्ञाb ) जातिवाचक संज्ञा – 2 प्रकार के होते हैंजैसे :द्रव्यवाचक संज्ञासमूहवाचक संज्ञा2) भाववाचक संज्ञा

1# व्यक्तिवाचक संज्ञा (Vyakti Vachak sangya)

ऐसे संज्ञा शब्द जो किसी विशिष्ट व्यक्ति, वस्तु और स्थान के नाम को इंगित करते हैं, विशेष रूप से उन संज्ञा शब्दों को उचित संज्ञा या उचित संज्ञा कहा जाता है, जैसे राम, गंगा, हरि, ओडिशा, हिमालय, स्नेहा, आदि।

2# जातिवाचक संज्ञा (Jativachak Sangya)

ऐसे संज्ञा शब्द या नाम जो किसी व्यक्ति, स्थान या चीजों के जाती के नाम का उल्लेख करते हैं, उन संज्ञा शब्दों और नामों को जाति संज्ञा कहा जाता है,जैसे माँ ,पिता ,भाई,नदी,पहाड़,जंगल,लड़का,लड़की ,आदि।

जातिवाचक संज्ञा के भेद :

जातिवाचक संज्ञा दो प्रकार के होते हैंa ) द्रव्यवाचक संज्ञाb ) समूहवाचक संज्ञा

a# द्रव्यवाचक संज्ञा (Dravya Vachak Sangya)

संज्ञा शब्द या नाम जो किसी निर्दिष्ट पदार्थ के नाम को संदर्भित करते हैं, उन संज्ञा शब्दों को द्रव्यवाचक संज्ञा कहा जाता हैं, जैसे मिट्टी, मेज, कुर्सी, कपास, भोजन, तेल, लकड़ी, जूट, कॉफी, आदि।

b# समूहवाचक संज्ञा (Samuh Vachak Sangya)

ऐसे संज्ञा शब्द जो किसी निर्दिष्ट व्यक्ति, वस्तु या स्थान के समूह के नाम को दर्शाते हैं, उन संज्ञा शब्दों को विशेष रूप से समूहवाचक संज्ञा कहा जाता है, जैसे अनुष्ठान, पार्टी, समाज, समिति, झुंड, सभा, आदि।

3# भाववाचक संज्ञा (Bhav Vachak Sangya )

भाववाचक संज्ञा के परिभाषा – किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के भाव को व्यक्त करने वाले संज्ञा शब्दों को विशेष रूप से भाववाचक संज्ञा कहा जाता हैं , जैसे सौंदर्य, क्रूरता, वीरता, दान, प्रतिभा, शांति, शीतलता, करुणा। ,आदि ।

फाइनल वर्ड :

हमें विश्वास है,यह लेख के सहायता से आप संज्ञा(Sangya in Hindi) तथा उसके सभी प्रकारों के बारे में बेहतर से जान गए होंगे ,इसलिए आपके मन में संज्ञा के सम्बंधित कोई डाउट नहीं रहा होगा ,लेकिन फिर भी संज्ञा को लेकर आपके पास कोई सवाल है तो हमे कमेंट के जरिए पूछ सकते हैं , साथ ही हमे कमेंट के जरिए यह भी बताइए की यह लेख आपकेलिए फायदेमंद रहा या नहीं।

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